the blue bottle

ज़िंदगी पानी की उस नीली बोतल के इर्द गिर्द मंडराने सी लगी थी

दिन मे चार बार उसे भरो

खाली करो

desk पे रखी वो बोतल हर चीज़ का इलाज थी

भूख

प्यास

समय

सब उससे नपने लगे थे

एक वो बोतल और फिर chewing gum

हर मर्ज़ का उपाया थी ये

कॅफेटीरिया का उबला हुआ सा खाना

पेस्ट्री जो ज़्यादा मीठी हो

इस नीली बोतल के पानी के ज़र्रों से ‘taste change’ होता था!

call पर बैठे बैठे ज़िंदगी के हज़ार खुली आँखों से देखे सपने इसी बोतल के ढक्कन के खुलने और बंद होने मे समाने लगे थे..

‘stress buster’ सा बन गया था इस नीली बोतल का मोटा नीला ढक्कन!

बारिश की आवाज़ ऑफीस के cubicle मे नही आती तो क्या.. इस बोतल मे पानी के छलक्ने की आवाज़ तो है

धूप के देवदार से ‘play of shadows’ भी खेलती यही नीली बोतल

दवा को डकारती

दुआ को पुकारती

acidity से राहत थोड़ा सा eno और ये नीली बोतल

थकान मिटाने के लिए आँखें सेके यही नीली बोतल

और रोज़ मर्राह के काम को छोड़ घर जाने का संदेश भी दे यही नीली बोतल.

नापी तोली सी ज़िंदगी

बोतल का नापा तोला सा पानी

गुस्से को शांत करता इसी बोतल से निकला पानी का कतरा

झरनों के ख्वाब मे लपेटा भी इसी बोतल के पानी का ज़ररा

ये नीली बोतल

और ज़िंदगी तो मापता इसके पानी का सिलसिला!

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