You

I dream of another today
Wishing for another tomorrow…

I walk like a child.. taking my first steps
I hold onto your finger.. afraid I might fall

You hold me
You believe
You let me take my free fall!
You know I will make it..
You trust the spirit of my soul..!

Nightmares as they surround..
Dreams as they mount..
Tears as they evaporate to clouds
And songs.. to the rhythm they surrender

Yet..
I dream of another today
Wishing for another tomorrow…
Knowing that you are there..
and we will walk together as oceans follow!

khwaab?

खवाबों का वो आसमान
ख्वाब देखती वो ज़मीन
हर पल एक आस..
हर लम्हा एक एहसास

तेरे बिन.. तेरी यादों का साया
तेरे साथ.. वो तेरी तस्वीर!
हर लम्हे मे लिपटे
वो पलों की अनकही तासीर

तेरे बिन.. ज़िंदगी के अधूरे होने का एहसास
तेरे साथ.. कयी मुकम्मल दिन
तेरा हाथ थामे.. कर गुज़रने की तमन्ना
खुद ही अकेले.. धड़कने बेरूख़ी गिन

खवाबों का वो आसमान
ख्वाब देखती वो ज़मीन

तेरे साथ की अंजानी सी महफ़िल मे
मेरा ज़हन तेरी ही परच्छाई बुने
तू नही तो मैं इस धरती की मिट्टी मे हीन

हां…
खवाबों का वो आसमान
ख्वाब देखती वो ज़मीन

baandh

और . आज भी अपनी तन्हाई को लेकर वो confused था… उसे उसका साथ चाहिए भी था और नही भी.. ज़िंदगी उसे एक अजीब से मोड़ पे ले आई थी.. उसकी आँखों की अनकही बातों की यादें उसे आज बहुत परेशान कर रही थी..

वो उससे कुछ कहना चाहता था.. पर उसे ये नही पता था की वो सुनना क्या चाहता था… जवाब मे आज भी अगर खामोशी मिले तो वो उदास होता था.. पर उन आँखों के सवाल मिले तो उसे गुस्सा आता था…

दूसरी तरफ उसकी आँखें अब खुद से ही बातें कर लेती थी.. एक painting मे कयी बार एक तूफान से उमड़ के सामने आता था जो शायद उसके मॅन की बातों को लफ्ज़ देने की महेज़ एक कोशिश थी… उसकी ज़िंदगी काफ़ी बदल चुकी थी.. रफ़्तार भी बढ़ गयी थी… और वक़्त भी कम हो गया था… उसे बहुत सारी चीज़ें ठीक करनी थी.. पर शायद कहीं वो इन सब से भाग रही थी…

कभी कभी escapism is not just the easy way it is bliss. but it has always been short term..  उसे पता था कि उसे दो दिन बस खुद को खुद का साथ देने के लिए चाहिए थे… एक बाँध फटने की कगार पे था…

mumbai

मुंबई शहर… बहुत यादें जुड़ी हैं इस शहर से इस गुमनाम सी राइटर की… किसी हद तक ज़िंदगी मे जीतने प्यार हुए हैं उनका भी damn Maximum City connection काफ़ी deep रहा है! and then बारिश मे ये शहर और भी रोमानी हो जाती है.. it’s almost as if every nook and corner of the city has a story to tell… बस एक लंबी walk और एक never ending लोकल ट्रेन पे निकलने की ज़रूरत है!

खैर आज ना walk है ना local train.. आज बड़ी बहेन के घर, उसकी study मे खिड़की के पास बैठे बोरीवली के पहाड़ों का नज़ारा है.. दूर कहीं कोई ढोल की आवाज़ है… ढेर सारी चिड़िया और डडू … और एक प्याली चाय!

मुझे अब भी याद हैं वो summer training वाले दिन जब मैं रोज़ सुबह उठके वॅडाला से दादर की बस लेती थी.. और वहाँ से मिलती थी ऑफीस बस! किसी दिन ऑफीस बस छूट जाए तो बस लोकल ट्रेन का सहारा! rain, hail, अब snow तो होती नही.. पर जैसे तैसे किसी भी हालत मे रोज़ ऑफीस पहुँचते.,. वहाँ से कल्टी होने के बहाने ढूँढते (अब management trainees कितना ही कर लेंगे.. but i guess i was one of the lucky few with a great boss and a great mentor!) और सीधे hiranandani पहुँचते उनसे मिलने! 😉 उसके बाद रोज़ रात को big sis से झगड़ा की कितना late आती है…! somethings decidedly never change… she’s a lot more patient with me coming late now… but definitely nosey and upset about it! 😉 hee hee..

लेकिन उसके बाद से कोई ऐसा नही मिला जिसे मुंबई से बे-इंतेहा मोहब्बत हो… the writer in me would love to spend 3 weeks just travelling the lanes and bylanes and discovering the romance! Town कहते हैं लोग… पर मुझे तो चर्चगेट ही पसंद है… वो causeway के बगल से एक खूबसूरत library.. उसकी सफेद सीढ़ियाँ! i almost started a book sitting there once… but it never completed coz i never got back! If there is one thing that rivals the inspiration of the mountains it is this city with every persons eyes capable of expressing such deep random emotion… if you give in it will take you into a very very stormy sea… उसके थोड़ा आगे Cafe Universal… वहाँ के waiter से तो अब जैसे दोस्ती हो चली है… देखते ही एक mug beerर लेके ही आता है! और उसके बाद he knows i love the fish cutlets he has! he also knows that i will take just that and sit for the next 5 hours either reading poetry or writing away… but i let him indulge his passion for photography as i sit there and he catches my face in myriad bits of light..! हमेशा देने का वादा किया है वो तस्वीरें.. आज तक बस उस camera की स्क्रीन मे जो previews देखे हैं.. उन्ही की एक छाप है मेरे दिमाग़ मे… nothing more.

and then the causeway in itself… एक अंजान राही की ज़िंदगी जैसे रंगो मे ढल गयी हो.,. if i live in mumbai i can live on half the money i spend in bangalore… tats a fact that can’t change! एक तो writers की indulgence वैसे ही माहौल मे मिल जाए तो writer खुश रहता है.. और फिर एक छोटा सा बरसाती (एक इंसान को इससे ज़्यादा क्या चाहिए) and places like the causeway to indulge! खाने पीने के तो वैसे ही काफ़ी जुगाड़ है…i esp love the parsi home made ice cream you get near the church gate station पर अब सुनते हैं वो दुकान शायद बंद हो गयी है…

“शायद” बहुत होते हैं ना ज़िंदगी मे… शायद ऐसा होता.. शायद वैसा होता है.. शायदा मैं वहाँ हो सकती थी… और इन शायदों मे कहीं हम खो जाते हैं…i quite realized this शायद business when i was just sitting with my nephew and watching the ice age meltdown again! शायद सही मे.. जीवन मे सब कुछ एक acorn पे ही dependent है! ~laughs!

ज़िंदगी की एक अजीब सी पहेली बन जाती है कई बार… एक तरफ हमे मुंबई से ये मोहब्बत है… वो गलियों मे बैठी सुबह 9 बजे ताज़ी मछली बेचने वाली दीदी, वो फ्रेश मटन जो सुबह 10 बजे मिले…which can all make a o who loves to cook feel quite inspired! और वहीं दूसरी तरफ हमे बॅंगलुर मे अपने नीले floor वेल बरसाती से भी लगाव है! traffic तो मानो मुंबई मे इतना बढ़ गया है की अब स्टेशन तक पहुँचने मे ही 45 minutes लग जाते हैं..! Bangalore traffic भी बढ़ तो गया है but it’s not quite so bad yet… Bangalore मे ना inspiration जो है वो बस उस चार कमरे की बरसाती मे मिलता है… यहाँ एक पूरा चलता फिरता शहर आए दिन inspire करता है! 🙂 फ़र्क़ तो है!

but as they say… i need a day job to pay for what i like to do! 😉 (and im lucky i quite like the day job too!)

insanity

understand… she sighed
and stared right into a blank

missing a purpose… wanting some hope
drifting without a drift
on an endless slope

staring at empty sheets of paper
creating voids in a desperate attempt to fill them

looking up to see the arctic tern
flying south
single minded purpose
guiding the flapping around
the wings up and down
the wind asway

only a human she
could never fathom her destiny
tried in vain to understand
the larger purpose the arctic tern had
a soul search
a black hole
and little joys as they fell apart

missing a purpose… wanting some hope
drifting without a drift
on an endless slope

a roll a push a slide a wave
a jolt… a jolt to the other side of insane
celebrating the madness
loving the dark
half mad and smiling in the corner of the red brick wall

golden rays engulfing the chaos
a wicked glint
a stunning dive
the arctic tern she knew had arrived
embracing the insane
looking over to the bright side.. serenity..
yes. it had been on her mind!

finding the purpose… believing in hope
still.. drifting without a drift
on an endless slope

blessing in deep disguise

phone connected to car stereo and playing songs on shuffle…

starts conservatively with nice hindi song that will appeal to whole family… “naav” from udaan! echoes of yes yes nice song.. i want in my phone too et al! (no big surprise.. on went the bluetooth and due transfers happened!)

song changes to oasis… ‘who feels love’ – Mom (who’s by the way not ventured away from bollywood music in this life) and di (who’s not had anything to do with music for as long as i can remember now) go “Nice!! We want this too!” – just a raised eyebrow from yours truly.. after all it wasn’t too complicated!

song changes to U2 – ‘vertigo’ – Mom: “now this is good music!!”

Your Truly (eyes popping out): “serious??!!!”

Mom – ya.. i like the dhinchak dhinchak beat!

Your Truly – mixed emotions overload.. looks out window!

Song changes to Be Yourself – Audioslave!

Mom: “I want this too!”

Your Truly (by now absolutely shocked at what’s been going on): “Really?!”

Mom (very profound expression): “so u’ve always known i like Govinda songs… all dhinchak dhinchak!”

and in one tiny eternal moment it had all been equated to Govinda songs.. (I shall never forget the lullaby’s i have heard as a kid!) yes you are allowed to go break your head somewhere as I am breaking mine now!

chalte chalte

एक राहगीर की दिल-ए-दास्तान सुन सकते हो क्या तुम?
दस्तकारी उसकी ज़िंदगी पे की है किसने.. जान सकते हो क्या तुम?

किस मुकाम-ए-मंज़िल को खोजने वो चला है
किस पड़ाव-ए-आसमान को देखने वो रुका है
कहाँ घूमती है उसकी नज़र
किसकी आँखों मे अपना मुकाम खोजती है उसकी नज़र?

पन्ने पलटती किताबों मे क्या वो शायरी ढूँढ रहा है?
या वो क़ैद-ए-फूल हैं जिनका जज़्बा महसूस करने चला है?
कहाँ घूमती है उसकी नज़र
किसके ख्वाबों मैं जाकर मुककमल होती है ये पहर?

एक ठहराव सा हर कदम मे आने क्यों लगा है?
एक "रुकाआवट के लिए खेद है" जैसा मेसेज है यहाँ क्यों?
खिदमते उदासी पेश करता क्यों चला है?
किस मुकाम-ए-मज़िल को खोजने वो चला है

एक राहगीर की दिल-ए-दास्तान सुन सकते हो क्या तुम?
दस्तकारी उसकी ज़िंदगी पे की है किसने.. जान सकते हो क्या तुम?
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ek raahgir ki dil-e-dastaan sun sakte ho kya tum?
dastaakri uski zindagi pe ki hai kisne.. jaan sakte ho kya tum?

kis mukaam-e-mazil ko khojne vo chala hai
kis padaave-e-aasmaan ko dekhne vo ruka hai
kahan ghoomti hai uski nazar
kiski aankhon me apna mukaam khojti hai uski nazar?

panne palat ti kitabon me kya vo shaayari dhoondh raha hai?
ya vo kaide-e-phool hain jinka jazba mehsus karne chala hai?
kahan ghoomti hai uski nazar
kiske khwaabon main jaakar mukkamal hoti hai ye pahar?

ek thehraav sa har kadam me aane kyon laga hai?
ek 'rukaaavat ke liye khed hai" jaisa message hai yahan kyon?
khidmate udaasi pesh karta kyon chala hai?
kis mukaam-e-mazil ko khojne vo chala hai

ek raahgir ki dil-e-dastaan sun sakte ho kya tum?
dastaakri uski zindagi pe ki hai kisne.. jaan sakte ho kya tum?